प्रागैतिहासिक काल

  1. प्रागैतिहासिक काल का वर्गीकरण:-

इस उपमहाद्वीप में संस्कृतियों और सभ्यताओं के कारण भारतीय इतिहास विदेशियों समेत कई लोगों के लिए रुचि का विषय है। भारत का इतिहास राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक या आर्थिक प्रमुखों के तहत अध्ययन किया जा सकता है।


इस कालक्रम मे भारतीय इतिहास को तीन काल में वर्गीकृत किया जा सकता है - 1. प्राचीन भारत  2. मध्ययुगीन भारत  3. आधुनिक भारत।

प्राचीन भारत ( पूर्व ऐतिहासिक कल से  700 ई पूर्व)

भारतीय उपमहाद्वीप में 20 लाख साल (2 मिलियन वर्ष) पहले प्रोटो-इंसानों (होमो इरेक्टस) की गतिविधियों और 70,000 ईसा पूर्व से होमो सेपियंस की गतिविधियां थीं। लेकिन वे संग्रहक / शिकारी थे। भारतीय उपमहाद्वीप के पहले निवासी नागा (उत्तर-पूर्व), संथाल (पूर्व भारत), भिल्स (मध्य भारत), गोंड (मध्य भारत), टोडस (दक्षिण भारत) आदि जैसे आदिवासी हो सकते हैं। उनमें से अधिकतर ऑस्ट्रिया, पूर्व द्रविड़ भाषाएं, जैसे मुंडा और गोंडवी भाषा बोलने वाले थे। द्रविड़ और आर्यों को अप्रवासी माना जाता है जो बाद में उपमहाद्वीप में आए थे।
प्रागैतिहासिक काल को अन्य प्रमुखों काल जैसे पुरापाषाण , मध्य पाषाण और नवपाषाण काल के तहत किया जा सकता है - जो लोगो द्वारा इस्तेमाल किए गए पत्थर / धातु उपकरण के प्रकार के आधार पर  हैं।

भारत का इतिहास प्रागैतिहासिक काल से आरम्भ होता है।

  • 'पूर्व पाषाण युग मे मानव जीविका का मुख्य साधन शिकार था I
  • आग का आविष्कार पूरा-पाषाण मे तथा पहिये का आविष्कार नव पाषाण काल मे हुआ I
  • मनुष्य ने सबसे पहले कुत्ता पाला था I
  • मनुष्य ने सबसे पहले तांबे का इस्तेमाल किया व उससे कुलहरी पहला औज़ार बनाया था I
  • 3000 ई. पूर्व तथा 1500 ई. पूर्व के बीच सिंधु घाटी में एक उन्नत सभ्यता वर्तमान थी,
  • जिसके अवशेष मोहनजोदड़ो  और हड़प्पा में मिले हैं।
  • विश्वास किया जाता है कि भारत में आर्यों का प्रवेश बाद में हुआ।
  • आर्यों ने पाया कि इस देश में उनसे पूर्व के जो लोग निवास कर रहे थे,
  • उनकी सभ्यता यदि उनसे श्रेष्ठ नहीं तो किसी रीति से निकृष्ट भी नहीं थी।
  • आर्यों से पूर्व के लोगों में सबसे बड़ा वर्ग द्रविड़ों का था।
  • आर्यों द्वारा वे क्रमिक रीति से उत्तर से दक्षिण की ओर खदेड़ दिये गए। जहाँ दीर्घ काल तक उनका प्रधान्य रहा।
  • बाद में उन्होंने आर्यों का प्रभुत्व स्वीकार कर लिया। उनसे विवाह सम्बन्ध स्थापित कर लिये और अब वे महान् भारतीय राष्ट्र के अंग हैं।
  • द्रविड़ों के अलावा देश में और मूल जातियाँ थी, जिनमें से कुछ का प्रतिनिधित्व मुण्डा, कोल, भील आदि जनजातियाँ करती हैं
  • जो मोन-ख्मेर वर्ग की भाषाएँ बोलती हैं।
  • भारतीय आर्यों का प्राचीनतम साहित्य हमें वेदों में विशेष रूप से ऋग्वेद में मिलता है,
  • जिसका रचनाकाल कुछ विद्वान् तीन हज़ार ई. पू. मानते हैं।
  • वेदों में हमें उस काल की सभ्यता की एक झाँकी मिलती है।
  • आर्यों ने इस देश को कोई राजनीतिक एकता प्रदान नहीं की।
  • यद्यपि उन्होंने उसे एक पुष्ट दर्शन और धर्म प्रदान किया, जो हिन्दू धर्म के नाम से प्रख्यात है और कम से कम चार हज़ार वर्ष से अक्षुण्ण है।

  1. पुरापाषाण काल (25,00,000 - 10,000 ईसा पूर्व)

पाषाण काल के मुख्य तथ्य
  • आग की खोज
  • चुना पत्थर से बने उपकरण
  • शुतुरमुर्ग के अंडे
  • महत्वपूर्ण पालीओलिथिक साइट्स: भीम्बेटका (एम.पी.), हुनस्गी, कुरनूल गुफाएं, नर्मदा घाटी (हठनोरा, एम.पी.), कलादगी बेसिन
  1. मध्य पाषाण काल( 10,000 - 4000 ई. पू.)

  • प्रमुख जलवायु परिवर्तन हुआ
  • इस युग पालतू जानवर यानी मवेशी पालन शुरू हुआ
  • निम्नपाषाण ब्राह्मणगिरी (मैसूर), नर्मदा, विंद्य, गुजरात में मिले I
  1. नवपाषाण काल (6000 - 1000 ई. पू.)

  • इस युग मे कृषि शुरू की गयी I
  • पहिये की खोज भी इसी युग मे हुई
  • पहला गाँव इनामगांव था I
  • महत्वपूर्ण  साइटें: बुर्जहम (कश्मीर), गुफ्रल (कश्मीर), मेहरगढ़ (पाकिस्तान), चिरंद (बिहार), दाओजली हैडिंग (त्रिपुरा / असम), कोल्डिवा (यूपी), महागारा (यूपी), हॉलूर (एपी), पाययंपल्ली (एपी) ), मास्की, कोडदेकल, संगाना कालर, उत्न्नूर, तक्कला कोटा।
  • मेगालिथिक साइट्स: ब्रह्मगिरी, आदिचानल्लूर
  1. आधऐतिहासिक काल:-

इस काल को दो भागो मे बाटा गया है
  1. i) ताम्रपाषाण काल (3500 -1200 ई पू.)
  2. ii) लौह काल (1100 - 600 ई पू.)
ताम्रपाषाण काल को पुनः तीन चरणों मे विभाजित किया गया है:-
अ) ताम्रपाषाण काल चरण I (3500 - 2500 ई पू.)
ब) ताम्रपाषाण काल चरण II (2500 - 1700 ई पू.)
स) ताम्रपाषाण काल चरण III (2000 -1200 ई पू.)