भारत की मौद्रिक नीति : एक नजर

मौद्रिक नीति - आर्थिक नीति के अंतिम उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक नीति केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में ब्याज दरों, मुद्रा आपूर्ति और ऋण की उपलब्धता जैसे परिमाणों को विनियमित करने के लिए मौद्रिक साधनों के उपयोग को सूचित करती।


  • अधिनियम में निर्दिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक लिखतों के उपयोग के संबंध में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को दर्शाती है।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी निहित है।
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  • यह ज़िम्मेदारी भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत स्पष्ट रूप से अनिवार्य है।


मौद्रिक नीति के लक्ष्य
  • मौद्रिक नीति का मुख्य उद्देश्य वृद्धि के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है।
  • मूल्य स्थिरता संधारणीय वृद्धि की आवश्यक शर्त है।
  • मई 2016 में, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) अधिनियम, 1934 को संशोधित किया गया
  • जिससे कि लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण ढांचे के कार्यान्वयन के लिए सांविधिक आधार प्रदान किया जा सके।
  • संशोधित आरबीआई अधिनियम में रिज़र्व बैंक के परामर्श से प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार भारत सरकार द्वारा मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करने का प्रावधान भी किया गया है।
  • तदनुसार, केंद्रीय सरकार ने सरकारी राजपत्र में 5 अगस्त 2016 से 31 मार्च 2021 तक की अवधि के लिए लक्ष्य के रूप में 4 प्रतिशत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति अधिसूचित किया है
  • जिसमें ऊपरी सहनशीलता सीमा 6 प्रतिशत और नीचली सहनशीलता सीमा 2 प्रतिशत होगी।
  • केंद्रीय सरकार ने निम्नलिखित को उन कारकों के रूप में अधिसूचित किया है जिनसे मुद्रास्फीति लक्ष्य हासिल करने में असफलता मिल सकती है
(क) औसत मुद्रास्फीति किन्हीं तीन लगातार तिमाहियों के लिए मुद्रास्फीति लक्ष्य के ऊपरी सहनशीलता स्तर से अधिक हो,  (ख) औसत मुद्रास्फीति किन्हीं तीन लगातार तिमाहियों के लिए नीचले सहनशीलता स्तर से कम हो।
  • मई 2016 में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम में संशोधन करने से पहले, लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण ढांचे को सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक के बीच 20 फरवरी 2015 को मौद्रिक नीति ढांचे पर हुए करार द्वारा नियंत्रित किया गया था।
मौद्रिक नीति ढांचा
  • संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम स्पष्ट रूप से रिज़र्व बैंक के लिए देश के मौद्रिक नीति ढांचे को परिचालित करने के लिए विधायी अधिदेश का प्रावधान करता है।
  • इस ढांचे का लक्ष्य वर्तमान और उभरती समष्टि-आर्थिक स्थिति और मुद्रा बाजार दरों को रेपो दर के आसपास संचालित करने के लिए चलनिधि स्थिति के उतार-चढ़ाव के आकलन के आधार पर नीति (रेपो) दर निर्धारित करना है।
  • मुद्रा बाजार के माध्य्म से रेपो दर बदलाव पूरी वित्तीय प्रणाली में अंतरित होते हैं जो आगे मुद्रास्फीति और वृद्धि के मुख्य निर्धारक तत्व समग्र मांग को प्रभावित करते हैं।
  • रेपो रेट की घोषणा के बाद, रिज़र्व बैंक द्वारा तैयार किए गए परिचालन ढांचे में उचित कार्रवाई के माध्यम से दैनिक आधार पर चलनिधि प्रबंधन की परिकल्पना की गई है,
  • इस कार्रवाई का लक्ष्य परिचालन लक्ष्य-भारित औसत कॉल दर (डब्ल्यूएसीआर) को रेपो दर के आसपास संचालित करना है।
  • परिचालन ढांचे को मौद्रिक नीति रुख की अनुरूपता को सुनिश्चित करते हुए उभरती वित्तीय बाजार और मौद्रिक स्थिति के आधार पर सही और संशोधित किया गया है।
  • चलनिधि प्रबंधन ढांचे को पिछली बार अप्रैल 2016 में उल्लेखनीय रूप से संशोधित किया गया था।
मौद्रिक नीति प्रक्रिया
  • संशोधित आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45जेडबी में अधिकारप्राप्त छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का प्रावधान भी किया गया है जिसका गठन केंद्रीय सरकार द्वारा सरकार राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से किया जाएगा। तदनुसार, केंद्रीय सरकार ने सितंबर 2016 में एमपीसी का निम्नानुसार गठन किया :
  1. भारतीय रिज़र्व बैंक का गवर्नर – पदेन अध्यक्ष;
    2. मौद्रिक नीति का प्रभारी उप गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक – पदेन सदस्य;
    3. केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित भारतीय रिज़र्व बैंक का एक अधिकारी – पदेन सदस्य;
    4. श्री चेतन घाटे, प्रोफेसर, भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (आईएसआई) – सदस्य;
    5. प्रोफेस पामी दुआ, निदेशक, दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स – सदस्य और
    6. डॉ. रविन्द्र एच. ढोलकिया, प्रोफेसर, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद – सदस्य
(उपर्युक्त 4 से 6 पर संदर्भित सदस्य चार वर्ष की अवधि या अगले आदेश आने तक, जो भी पहले हो, पद पर रहेंगे।)
  • एमपीसी मुद्रास्फीति लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपेक्षित नीति ब्याज दर का निर्धारण करती है।
  • एमपीसी की पहली बैठक वर्ष 2016-17 के लिए चौथे द्विमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य से पहले 3 और 4 अक्टूबर 2016 को आयोजित की गई।
  • रिज़र्व बैंक का मौद्रिक नीति विभाग (एमपीडी) मौद्रिक नीति बनाने में एमपीसी की सहायता करता है।
  • अर्थव्यव्सथा के मुख्य स्टेकधारकों क विचार, रिज़र्व बैंक का विश्लेषणात्मक कार्य नीति रेपो दर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में योगदान देते हैं।
  • वित्तीय बाजार परिचालन विभाग (एफएमओडी) मुख्य रूप से दैनिक चलनिधि प्रबंध परिचालनों के माध्यम से मौद्रिक नीति को परिचालित करता है।
  • चलनिधि स्थिति की समीक्षा करने के लिए वित्तीय बाजार समिति (एफएमसी) की दैनिक बैठक होती है
  • जिससे कि भारित औसत कॉल मुद्रा दर (डब्ल्यूएसीआर) के परिचालन लक्ष्य को सुनिश्चित किया जा सके।
  • एमपीसी के गठन से पहले, मौद्रिक नीति पर तकनीकी परामर्शदात्री समिति (टीएसी) जिसमें मौद्रिक अर्थशास्त्र, केंद्रीय बैंकिंग, वित्तीय बाजार और सार्वजनिक वित्त के विशेषज्ञ होते थे,
  • रिज़र्व बैंक को मौद्रिक नीति के रुख पर सलाह देती थी।
  • तथापि, इसकी भूमिका केवल परामर्शदात्री थी। एमपीसी के गठन के साथ मौद्रिक नीति पर टीएसी अब अस्तित्व में नहीं है।
मौद्रिक नीति की लिखतें
मौद्रिक नीति के कार्यान्वयन में कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लिखतों का उपयोग किया जाता है।
  • रेपो दर: निर्धारित ब्याज दर जिस पर रिजर्व बैंक चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत बैंकों को सरकार के संपार्श्विक के विरुद्ध और अन्य अनुमोदित प्रतिभूतियों के विरुद्ध ओवरनाईट चलनिधि प्रदान करता है।
  • रिवर्स रेपो दर: निर्धारित ब्याज दर जिस पर रिजर्व बैंक चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत बैंकों से पात्र सरकारी प्रतिभूतियों के संपार्श्विक के विरुद्ध, ओवरनाइट आधार पर, चलनिधि को अवशोषित करता है।
  • चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ): एलएएफ में ओवरनाईट और साथ ही आवधि रेपो नीलामियां शामिल हैं।
  • उत्तरोत्तर, रिज़र्व बैंक सुसंगति के लिए चलनिधि डालने के अनुपात में अलग अलग अवधि के परिवर्तनीय दर रेपो नीलामी द्वारा वृद्धि की है।
  • आवधि रेपो का उद्देश्य अंतर-बैंक आवधि मुद्रा बाजार को विकसित करने में मदद करना है,
  • जो बदले में ऋण और जमा की कीमत के लिए बाजार आधारित बैंचमार्क निर्धारित कर सकते हैं,
  • और इस कारण से मौद्रिक नीति के प्रसारण में सुधार किया जा सकता हैं।
  • रिज़र्व बैंक बाजार स्थितियों के तहत आवश्यक होने पर, भी परिवर्तनीय ब्याज दर रिवर्स रेपो नीलामियों का संचालन करता है।
  • सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ): एक सुविधा जिसके तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक रिज़र्व बैंक से ओवरनाईट मुद्रा की अतिरिक्त राशि को एक सीमा तक अपने सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर) पोर्टफोलियो में गिरावट कर ब्याज की दंडात्मक दर ले सकते हैं।
  • यह बैंकिंग प्रणाली को अप्रत्याशित चलनिधि झटकों के खिलाफ सुरक्षा वाल्व प्रदान करता है।
  • कॉरिडोर: एमएसएफ दर और रिवर्स रेपो दर भारित औसत कॉल मनी दर में दैनिक संचलन के लिए कॉरिडोर को निर्धारित करते हैं।
  • बैंक दर: यह वह दर है, जिस पर रिज़र्व बैंक विनिमय बिलों या अन्य वाणिज्यिक पत्रों को खरीदने या बदलने के लिए तैयार है।
  • बैंक दर भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 49 के तहत प्रकाशित की गई है।
  • यह दर एमएसएफ दर से जुड़ी हुई है और इसलिए, स्वचालित रूप से परिवर्तित होती है  जब एमएसएफ दर पॉलिसी रेपो रेट के साथ बदलती है।
  • नकदी आरक्षित निधि अनुपात (सीआरआर): निवल मांग और समय देयताओं की हिस्सेदारी जो बैंकों को रिज़र्व बैंक में नकदी शेष के रूप में रखनी होती है
  • जिसे रिज़र्व बैंक द्वारा समय समय पर भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया जाता है।
  • सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर): निवल मांग और समय देयताओं की हिस्सेदारी जो बैंकों को अभारित सरकारी प्रतिभूतियों, नकदी और स्वर्ण जैसी सुरक्षित और चल आस्तियों में रखना होता है।
  • एसएलआर में परिवर्तन अक्सर निजी क्षेत्र के लिए उधार देने के बैंकिंग प्रणाली में संसाधनों की उपलब्धता को प्रभावित करते हैं।
  • खुला बाजार परिचालन (ओएमओ): इनमें सरकारी प्रतिभूतियों की एकमुश्त खरीद/बिक्री, टिकाऊ चलनिधि डालने/अवशोषित करना क्रमशः दोनों शामिल हैं।
  • बाजार स्थिरीकरण योजना (एमएसएस): मौद्रिक प्रबंधन के लिए इस लिखत को 2004 में आरंभ किया गया।
  • बड़े पूंजी प्रवाह से उत्पन्न अधिक स्थायी प्रकृति के अधिशेष चलनिधि को अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियों और खजाना बिलों की बिक्री के जरिये अवशोषित की जाती है।
  • जुटाए जाने वाले नकदी को रिजर्व बैंक के पास एक अलग सरकारी खाते में रखा जाता है।
Note:- मौजूदा प्रभावशील पॉलिसी दर -  "वर्तमान दरें":-
आरक्षित अनुपात
सीआरआर : 4%
एसएलआर : 19.5%
विनिमय दरें
भारतीय रिज़र्व बैंक की संदर्भ दर
भारतीय रुपया/1 अमरीकी डॉलर : 67.3353
भारतीय रुपया/1 यूरो : 79.5230
भारतीय रुपया/100 जापानी येन : 61.2400
भारतीय रुपया/1 पाउंड स्टर्लिंग : 90.3707
उधार/जमा दरें
आधार दर : 8.70% - 9.45%
एमसीएलआर (ओवरनाइट) : 7.80% - 8.05%
बचत जमा दर : 3.50% - 4.00%
सावधि जमा दर > 1 वर्ष : 6.25% - 6.75%
बाजार प्रवृत्तिया
मुद्रा बाजार दरें
मांग दरें : 4.80% - 6.15% *
*पिछले दिन
सरकारी प्रतिभूति बाजार
7.17% सरकारी प्रतिभूति 2028 : 7.9628%
91 दिवसीय खज़ाना बिल : 6.5219%*
182 दिवसीय खज़ाना बिल : 6.8225%
364 दिवसीय खज़ाना बिल : 6.9939%
* अंतिम नीलामी में कट-ऑफ
पूंजी बाजार
एस एंड पी बीएसई सैंसेक्स : 35443.67 *
निफ्टी 50 : 10767.65 *
*पिछले दिन की स्थिति

खुला और पारदर्शी मौद्रिक नीति निर्माण

  • संशोधित आरबीआई अधिनियम के अंतर्गत, मौद्रिक नीति निर्माण निम्नानुसार है :
  • एमपीसी से वर्ष में कम से कम चार बैठक करना अपेक्षित है।
  • इसकी बैठक के लिए कोरम चार सदस्यों का है।
  • एमपीसी के प्रत्येक सदस्य का एक वोट है तथा वोटों के समान रहने की स्थिति में गवर्नर के पास दूसरा या कास्टिंग वोट है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अध्याय III एफ के प्रावधानों के अनुसार एमपीसी की प्रत्येक बैठक के समाप्त होने के बाद एमपीसी द्वारा अपनाया गया संकल्प प्रकाशित किया जाता है।
  • 14वें दिन एमपीसी की कार्यवाहियों पर कार्यवृत्त प्रकाशित किया जाता है जिसमें निम्नलिखित शामिल होता है :
क. एमपीसी द्वारा अपनाया गया संकल्प;
ख. संकल्प पर प्रत्येक सदस्य का कारणसहित वोट तथा
ग. अपनाए गए संकल्प पर प्रत्येक सदस्य का वक्तव्य
  • प्रत्येक छह महीने में एक बार, रिज़र्व बैंक से मौद्रिक नीति रिपोर्ट नामक दस्तावेज प्रकाशित करना अपेक्षित है
  • जिसमें निम्नलिखित को स्पष्ट किया जाता है :
क. मुद्रास्फीति के स्रोत और
ख. 6-18 महीने आगे की मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान।

विधिक ढांचा

स्त्रोत :- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया