मी टू कैम्पेन : एक पहल जागरूकता की ओर

क्या है मी टू कैम्पेन?

मी टू कैम्पेन एक अभियान है जिसमे दुनिया भर मे हो रहे महिलाओ के योंन उत्पीड़न का खुलासा सोशल मीडिया पर किया जा रहा है I प्यु रिसर्च सेंटर के मुताबिक सितम्बर के अंत तक 1.9 करोड़ बार मी टू को ट्वीट पर इस्तेमाल किया गया है I यानि की रोज औसतन 55 हजार 319 ट्वीट्स मी  टू से जुड़े है I

मी टू की शुरुआत :- 
  1. तराना बुर्क:- मी टू शब्द की शुरुआत 12साल पहले न्यूयार्क की तराना बुर्क (सामाजिक कार्यकर्ता) की थी I पेशे से सामाजिक कार्यकर्ता तराना बुर्क ने 2006 मे न्यूयार्क की एक पीड़ित से बात करते हुए उन्होने कहा था “यौम अकेली ही इस से पीड़ित नही हो I यह मेरे साथ भी हुआ था I इसके लिए उन्होने मी-तू शब्द का इस्तेमाल किया था I
  2. एलीसा मिलानों :- 15 अक्तूबर 2017 मे अक्टर्स एलिसा मिलानों की ट्वीट के कारण चर्चा का विषय बना I उन्होने लिखा था की अगर आप किसी यौन शोषण के शिकार है तो मेरे ट्वीट का जवाब मी टू लिखकर दे I इसी के साथ लाखो लोग इस कैम्पेन के साथ जुड़ गए I
  3. तनु श्री दत्ता:- भारत मे इसकी शुरुआत तनु श्री दत्ता ने की थी I इन्होने बताया की 2009 मे फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ के सेट पर नाना पाटेकर ने इंका यौन शोषण किया I

किन-किन पर लगाए गए आरोप...
  1. बॉलीवुड
    इंडिया में इसकी शुरुआत तनुश्री दत्ता ने की। उन्होंने 40 साल से एक्टिंग कर रहे और पद्मश्री पा चुके नाना पाटेकर पर 25 अक्टूबर को आरोप लगाए। इसके बाद विकास बहल, चेतन भगत, रजत कपूर, कैलाश खैर, जुल्फी सुईद, आलोक नाथ, सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य, तमिल राइटर वैरामुथु और मोदी सरकार में मंत्री एमजे अकबर पर भी आरोप लगाए गए हैं। इस कैंपेन के तहत खुलासे लगातार जारी हैं।
  • निर्देशको मे – साजिद खान, रजत कपूर, सुभाष घई, विकास बहल, विवेक अग्निहोत्री आदि I
  • सेलेब कंसल्टेंट सुहेल सेठ पर फिल्म निर्माता नताशा राठोड व चार अन्य महिलाए
  • सिंगर – अनु मालिक, कैलाषा खैर, अभिजीत भट्टाचार्य, रघु दीक्षित I
  • अभिनेता पीयूष मिश्रा, प्रोड्यूसर गोरांग दोषी, मॉडल जुल्फी सैयद व एक्शन डायरेटर शाम कौशल I
  1. मीडिया
  • विदेश राज्य मंत्री एमके अकबर पर प्रिय रमानी व अन्य महिलाए (90 के दशक मे)
  • पत्रकार विनोद दुआ पर फिल्म निर्माता निष्ठा जैन (घटना 1989)
  • पत्रकार सी गौरिदासन नायर, गौतम अधिकारी, फहद शाह, केआर श्री निवास, मयंक जैन, प्रशांत झा व सतादु ओझा I
  1. राजनीति
  • एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे फिरोज खान
  • केरल के सीपीआई-एम के विधायक एम मुकेश

कानून में इसे लेकर क्या प्रावधान...
  • 1992 में हुए भंवरी देवी गैंगरेप मामले के बाद विशाखा और कई दूसरे ग्रुप कोर्ट गए थे। 13 अगस्त 1997 को विशाखा फैसला दिया गया। इसमें विशाखा गाइडलाइंस दी गईं। यह वर्कप्लेस पर यौन शोषण को रोकने के लिए था। कानून न बनने तक इसे लागू करने के निर्देश कोर्ट ने दिए थे। इसके तहत...गलत तरीके से शारीरिक संपर्क, सेक्शुअल फेवर्स, भद्दी टिप्पणियां, पोर्न या उससे जड़ी चीजें दिखाना, गैरमर्यादित शारीरिक संबंध को सेक्शुअल हैरेसमेंट माना गया।
  • 2013 में सरकार ने इसे लेकर कानून बनाया। इसके बाद कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से महिलाओं का संरक्षण (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 अस्तित्व में आया।
  • सीनियर एडवोकेट विशांशु जोशी ने बताया कि इसके तहत हर संस्था में एक आंतरिक परिवाद समिति होना चाहिए। ये महिलाओं के साथ उत्पीड़न होने पर उनकी शिकायत सुनेगी और आगे की कार्रवाई करेगी।
  • कोई भी महिला अपने साथ हुए शोषण की शिकायत यहां कर सकती है। इसकी जांच को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाना चाहिए। साथ ही दोषी पाए जाने पर सर्विस नियमों के तहत संबंधित व्यक्ति पर कार्रवाई होना चाहिए।
  • आरोप ज्यादा गंभीर हैं तो पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई जा सकती है।
  • जो कंपनी यह समिति गठित नहीं करेगी, उसके खिलाफ 50 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। इसके बाद भी समिति गठित नहीं की गई तो उसकी मान्यता रद्द रकने की कार्रवाई की जा सकती है।
  • जिला स्तर पर भी ऐसी समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

कितनी सजा का प्रावधान...

  • किसी महिला का लैंगिग उत्पीड़न हुआ है तो वह आईपीसी की धारा 354(ए) के तहत शिकायत दर्ज करवा सकती है। इसमें 5 साल की सजा का प्रावधान है।
  • इसी तरह ताकत के साथ लज्जाभंग करने जैसे कपड़े फाड़ना आदि पर आईपीसी की धारा 354 के तहत शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। इसमें 3 साल की सजा का प्रावधान है।
  • महिला की लज्जाभंग करने पर आईपीसी की धारा 509 के तहत केस दर्ज होता है। इसमें 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।